SIAM ने अंतर्राष्ट्रीय ऑटोमोटिव सम्मेलन में जलवायु जिम्मेदारी का समर्थन किया

SIAM Conference

आगे बढ़ना: सतत गतिशीलता में अग्रणी भूमिका निभाने में SIAM की भूमिका

भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता सोसायटी (एसआईएएम) हाल ही में भारत में जलवायु परिवर्तन पर छठे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन ने कम कार्बन उत्सर्जन वाले भविष्य को बढ़ावा देने के लिए भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। सम्मेलन में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और शिक्षाविदों एवं अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। उन्होंने मिलकर भारत को सतत गतिशीलता की ओर अग्रसर करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।.

सम्मेलन में हुई चर्चाओं में ऑटोमोटिव क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कई नवोन्मेषी उपायों पर प्रकाश डाला गया। इनमें उन्नत प्रणोदन प्रौद्योगिकियों को अपनाना, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का एकीकरण और विनिर्माण प्रक्रियाओं में ऊर्जा दक्षता बढ़ाना शामिल है।.

सम्मेलन से प्राप्त मुख्य निष्कर्ष

  • नवोन्मेषी प्रणोदन प्रौद्योगिकियाँ: उद्योग जगत के नेताओं ने इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन प्रौद्योगिकियों में हुई प्रगति को साझा किया, जिनसे उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने और वायु गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।.
  • नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण: विशेषज्ञों ने विनिर्माण और परिचालन प्रक्रियाओं में सौर और पवन ऊर्जा के एकीकरण पर चर्चा की, जिससे न केवल जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है बल्कि समग्र कार्बन पदचिह्न भी घटता है।.
  • उत्पादन क्षमता में वृद्धि: कई सत्रों में उत्पादन लाइनों को सुव्यवस्थित करने और अधिक पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को अपनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिससे ऊर्जा की पर्याप्त बचत होती है और उत्सर्जन कम होता है।.

ये पहलें केवल वैश्विक मानकों के अनुपालन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रति उत्तरदायित्व की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने से भी जुड़ी हैं। इन प्रगतिशील प्रथाओं को अपनाकर भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनने के लिए तैयार है।.

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